8th Pay Commission 2025: कर्मचारियों के लिए 3 बड़ा झटका, 5 सपने अधूरे रहेंगे

Published On: August 29, 2025
8th Pay Commission 2025

सरकारी कर्मचारियों के लिए वेतन आयोग हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। हर वेतन आयोग के बाद सरकार कर्मचारियों की सैलरी, भत्ते और पेंशन से जुड़ी नई सिफारिशें लागू करती है। इससे करोड़ों कर्मचारियों और उनकी फैमिली की आर्थिक स्थिति पर सीधा असर पड़ता है।

अब खबर आ रही है कि केंद्र सरकार ने 8वें वेतन आयोग (8th Pay Commission) के गठन की प्रक्रिया शुरू कर दी है। कर्मचारियों को लंबे समय से इसकी उम्मीद थी। शुरुआत में यह सुनकर उनकी खुशी की कोई सीमा नहीं रही, लेकिन जब नए आयोग से जुड़ी कुछ जानकारी सामने आई, खासकर फिटमेंट फैक्टर से जुड़ी, तो कई कर्मचारियों का उत्साह ठंडा पड़ गया है।

फिलहाल हर कर्मचारी इस आयोग से जुड़ी ताज़ा अपडेट पर नजर बनाए हुए है, क्योंकि यह उनकी सैलरी और भविष्य की पेंशन पर सीधा असर डालेगा। आइए जानते हैं कि 8वें वेतन आयोग क्या है, इसमें फिटमेंट फैक्टर की भूमिका क्या है और इससे कर्मचारियों को क्या फायदा या नुकसान हो सकता है।

8th Pay Commission 2025

वेतन आयोग (Pay Commission) वह समिति होती है जो सरकार कर्मचारियों की सैलरी संरचना और भत्तों में सुधार के लिए बनाती है। अब तक भारत में 7 वेतन आयोग लागू हो चुके हैं। हर दस साल में एक नया आयोग गठित होता है जो बदलाव की सिफारिशें करता है।

7वां वेतन आयोग 2016 में लागू हुआ था। अब 7वें वेतन आयोग को लगभग 10 साल पूरे होने वाले हैं। इसी के चलते 8वां वेतन आयोग बनाने की कवायद शुरू हो गई है। इसका लक्ष्य कर्मचारियों की आय को महंगाई और भविष्य की जरूरतों के मुताबिक संतुलित करना है।

फिटमेंट फैक्टर क्या होता है?

वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर सबसे अहम भूमिका निभाता है। यह वह सूत्र होता है जिससे तय किया जाता है कि बेसिक पे (मूल वेतन) कितने गुना बढ़ेगा। इसका सीधा असर कर्मचारियों की कुल सैलरी पर पड़ता है।

7वें वेतन आयोग में फिटमेंट फैक्टर 2.57 रखा गया था। यानी कर्मचारियों के पुराने बेसिक पे को 2.57 गुना कर नई सैलरी तय की गई थी। यही वजह थी कि तब कर्मचारियों की आय में बड़ा इजाफा हुआ था।

कर्मचारियों की निराशा क्यों बढ़ी?

जब 8वें वेतन आयोग को लेकर चर्चा शुरू हुई तो कर्मचारियों ने उम्मीद की थी कि फिटमेंट फैक्टर 3.68 या उससे ज्यादा होगा। ऐसा होने पर उनकी सैलरी में काफी ज्यादा छलांग लग सकती थी।

लेकिन जो इनपुट अब तक सामने आए हैं, उसके मुताबिक इस बार फिटमेंट फैक्टर 2.57 या उस स्तर के आसपास ही रह सकता है, यानी इसमें कोई खास बढ़ोतरी नहीं दिख रही। इसका मतलब है कि कर्मचारियों की बेसिक सैलरी उतनी तेजी से नहीं बढ़ेगी जितनी उम्मीद थी।

इस खबर के बाद कर्मचारियों और पेंशनर्स में निराशा देखी जा रही है। उनका कहना है कि महंगाई लगातार बढ़ रही है लेकिन फिटमेंट फैक्टर को ज्यादा न बढ़ाकर उनकी उम्मीदों पर पानी फेर दिया गया है।

सरकार का पक्ष और कर्मचारियों की मांग

सरकार का तर्क है कि मौजूदा आर्थिक हालात को देखते हुए वेतन ढांचे में बहुत बड़ा बदलाव लाना संभव नहीं है। देश की अर्थव्यवस्था पर पहले से ही कई तरह का दबाव है। ऐसे में ज्यादा बड़ा फिटमेंट फैक्टर देने से सरकारी खर्च काफी बढ़ सकता है।

दूसरी ओर कर्मचारी संगठन कह रहे हैं कि उनकी जीवन-यापन लागत (Cost of Living) लगातार बढ़ रही है। महंगाई भत्ता (DA) बार-बार बढ़ाने पर भी राहत नहीं मिल रही। इसलिए फिटमेंट फैक्टर को कम से कम 3 गुना रखा जाए ताकि उनकी आय बेहतर हो सके।

किसे मिलेगा फायदा?

8वां वेतन आयोग लागू होने के बाद इसका फायदा केंद्र सरकार के करीब 50 लाख कर्मचारियों और 60 लाख से ज्यादा पेंशनभोगियों को मिलेगा। यह सीधे तौर पर करीब 1 करोड़ से ज्यादा लोगों और उनके परिवारों से जुड़ा है।

इसके अलावा राज्यों में भी कई बार केंद्र के मुताबिक ही वेतन सुधार किए जाते हैं, ऐसे में यह असर और ज्यादा बड़ा हो सकता है। यही वजह है कि हर वेतन आयोग पर सबकी नजर बनी रहती है।

आगे की राह

अभी तक 8वें वेतन आयोग की गठन प्रक्रिया शुरुआती दौर में है। रिपोर्ट तैयार होने और सिफारिशें आने में समय लगेगा। उसके बाद केंद्र सरकार उन्हें लागू करने पर अंतिम फैसला करेगी।

संभावना है कि आयोग की सिफारिशें वर्ष 2026 से लागू हो सकती हैं, क्योंकि 7वां वेतन आयोग भी 2016 में ही लागू हुआ था। हालांकि सटीक समयसीमा अभी साफ नहीं है।

निष्कर्ष

8वें वेतन आयोग की प्रक्रिया शुरू होने से कर्मचारियों में उत्साह तो है, लेकिन फिटमेंट फैक्टर को लेकर निराशा भी दिख रही है। सरकार और कर्मचारी संगठनों की राय अलग-अलग है। आने वाले समय में आयोग क्या सिफारिश करता है और सरकार उसे किस स्तर पर लागू करती है, यही तय करेगा कि कर्मचारियों की आय और जीवन स्तर में कितना सुधार होगा।

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