देश के करोड़ों केंद्रीय कर्मचारी और पेंशनभोगी पिछले कई सालों से अपने 18 महीने के बकाया महंगाई भत्ते (डीए एरियर) का इंतजार कर रहे थे। कोविड-19 के दौरान सरकार ने आर्थिक संकट को देखते हुए तीन किश्तों का महंगाई भत्ता रोक दिया था, जिसमें जनवरी 2020, जुलाई 2020 और जनवरी 2021 की किश्तें शामिल थीं।
अब इस मामले पर वित्त मंत्रालय की ओर से बड़ा अपडेट आया है। 11 अगस्त 2025 को लोकसभा में वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने स्पष्ट रूप से कहा है कि 18 महीने का बकाया डीए और डीआर (डियरनेस रिलीफ) देना अभी संभव नहीं है। इसके पीछे सरकार ने कोविड के बाद के आर्थिक प्रभाव और कल्याणकारी योजनाओं के खर्च को कारण बताया है।
इस लेख में जानिए कि क्यों सरकार ने इस फैसले पर मुहर लगाई है, 8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद की जा सकती है और आगे की क्या संभावनाएं हैं।
DA Arrears Update 2025
वित्त मंत्रालय ने संसद में एक अनस्टार्ड प्रश्न के जवाब में यह साफ कर दिया है कि कोविड-19 के दौरान जो 18 महीने का डीए फ्रीज़ किया गया था, उसका भुगतान नहीं होगा। सरकार ने कहा कि 2020 में महामारी का प्रतिकूल वित्तीय प्रभाव और सरकार द्वारा अपनाए गए कल्याणकारी उपायों की वजह से वित्तीय वर्ष 2020-21 से आगे तक प्रभाव पड़ा है।
सरकार के मुताबिक भारत का राजकोषीय घाटा वित्तीय वर्ष 2020-21 में 9.2 प्रतिशत से घटकर 2025-26 (बजट अनुमान) में 4.4 प्रतिशत हो गया है। लेकिन फिर भी महामारी के कारण हुए नुकसान और कल्याणकारी योजनाओं के खर्च के कारण डीए/डीआर का बकाया देना व्यावहारिक नहीं माना गया है।
यह फैसला उन तमाम केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स की उम्मीदों पर पानी फेर देता है, जो इस एरियर का बेसब्री से इंतजार कर रहे थे।
कोविड के दौरान क्यों रोका गया था महंगाई भत्ता?
23 अप्रैल 2020 को वित्त मंत्रालय के व्यय विभाग के कार्यालय ज्ञापन से डीए/डीआर की अतिरिक्त किश्तें जुलाई 2021 तक फ्रीज़ कर दी गई थी। इसका मतलब था कि उस अवधि में केवल पुरानी दरें मिलती रहीं और जो बढ़ोतरी हुई थी उसे रोका गया।
जुलाई 2021 से इसकी बहाली कर दी गई और कैबिनेट के द्वारा डीए/डीआर को 17% से बढ़ाकर 28% किया गया। लेकिन 1 जनवरी 2020 से 30 जून 2021 की अवधि के लिए कोई भी एरियर नहीं दिया जाना तय किया गया।
सरकार का तर्क था कि कोविड-19 के कारण आर्थिक व्यवधान हुआ था और सरकारी वित्त पर दबाव कम करने के लिए यह कदम उठाना पड़ा था।
8वें वेतन आयोग से क्या उम्मीद?
16 जनवरी 2025 को 8वें वेतन आयोग के गठन की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक इसके अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हुई है और न ही इसके टर्म ऑफ रेफरेंस तय किए गए हैं। 21 जुलाई 2025 को संसद के मानसून सत्र में राज्य वित्त मंत्री ने कहा कि अलग-अलग हितधारकों जैसे रक्षा, गृह मंत्रालय, डीओपीटी से इनपुट मांगे गए हैं।
कुछ विशेषज्ञों की उम्मीद है कि 8वां वेतन आयोग इन रुके हुए 18 महीने के एरियर के बारे में अपनी सिफारिशें दे सकता है। लेकिन यहां ध्यान रखना जरूरी है कि वेतन आयोग केवल सिफारिशें करता है, सरकार उन्हें मानने के लिए बाध्य नहीं होती।
आम तौर पर किसी भी नए वेतन आयोग को अपनी सिफारिशें तैयार करने और लागू होने में 18-24 महीने का समय लगता है। इसलिए 8वें वेतन आयोग की सिफारिशें संभवतः 2027 से लागू हो सकती हैं।
न्यायालयी मामले और अलग-अलग राज्यों की स्थिति
दिल्ली हाई कोर्ट ने 2020 में डीए/डीआर फ्रीज के खिलाफ दायर याचिका को खारिज कर दिया था और केंद्र सरकार के कदम को सही ठहराया था। लेकिन अलग-अलग राज्यों में तस्वीर अलग है।
कोलकाता हाई कोर्ट ने मई 2022 में राज्य कर्मचारियों के लिए डीए को अधिकार मानते हुए भुगतान के निर्देश दिए थे। इसे जीविका से जुड़ा हुआ अधिकार यानी आर्टिकल 21 के तहत जीवन जीने का अधिकार माना था।
सुप्रीम कोर्ट ने मई 2025 में बंगाल सरकार को डीए एरियर का 25% जमा करने के लिए कहा था। इससे पता चलता है कि अदालतें राज्य स्तरीय डीए विवाद को गंभीरता से ले रही हैं।
निष्कर्ष
सरकार की आधिकारिक स्थिति बिल्कुल साफ है कि 18 महीने के डीए/डीआर एरियर जारी करने की कोई योजना नहीं है। 8वां वेतन आयोग भी केवल सिफारिशें दे सकता है, लेकिन सरकार उन्हें मानने के लिए बाध्य नहीं है।
केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनर्स के लिए यह निराशाजनक खबर है, लेकिन अब उन्हें आगामी डीए हाइक और 8वें वेतन आयोग की सिफारिशों का इंतजार करना होगा। वर्तमान में जुलाई 2025 में डीए में 3-4% की बढ़ोतरी की संभावना है, जो कुछ राहत दे सकती है।