भारत सरकार और राज्य सरकारें समय-समय पर सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में बदलाव करती रहती हैं। इन बदलावों का मुख्य उद्देश्य यह होता है कि असली लाभार्थियों तक ही सहायता पहुँचे और फर्जीवाड़ा या दोहरी पेंशन जैसी समस्याओं पर रोक लगाई जा सके। इसी कड़ी में अब पेंशन प्राप्त करने वाले वृद्धा, विधवा और विकलांग लाभार्थियों के लिए Face E-Kyc की प्रक्रिया अनिवार्य की गई है।
अब तक कई राज्यों में पेंशनधारी केवल आधार लिंकिंग या बैंक खाते के जरिए पेंशन प्राप्त कर रहे थे। लेकिन सामने आया है कि कई लोग धोखाधड़ी कर पेंशन ले रहे हैं, वहीं असली जरूरतमंद कभी-कभी वंचित रह जाते हैं। इसी समस्या का समाधान निकालने के लिए सरकार ने फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए डिजिटल सत्यापन की व्यवस्था लागू की है।
इस नियम से यह सुनिश्चित होगा कि पेंशन केवल असली बुजुर्ग, विधवा और विकलांग व्यक्तियों को ही मिले। साथ ही, सरकार की योजनाओं में पारदर्शिता और सुरक्षा भी बढ़ेगी।
What is Face E-KYC?
भारत सरकार ने सामाजिक सुरक्षा योजनाओं के अंतर्गत ऐसे कमजोर वर्गों को वित्तीय सहायता देने के लिए अलग-अलग पेंशन योजनाएँ शुरू की हैं। इनमें मुख्य रूप से वृद्धावस्था पेंशन, विधवा पेंशन और विकलांग पेंशन शामिल हैं।
- वृद्धावस्था पेंशन योजना: इसमें 60 वर्ष से ऊपर के गरीब, अकेले और जरूरतमंद वरिष्ठ नागरिकों को मासिक पेंशन की सुविधा दी जाती है।
- विधवा पेंशन योजना: उन महिलाओं को आर्थिक सहयोग दिया जाता है, जिनके पति की मृत्यु हो चुकी है और जिनके पास आजीविका का कोई दूसरा साधन नहीं है।
- विकलांग पेंशन योजना: शारीरिक या मानसिक रूप से दिव्यांग व्यक्तियों को जीवन यापन के लिए सरकारी सहायता प्रदान की जाती है।
इन योजनाओं के तहत हर माह ₹500 से लेकर ₹1500 तक पेंशन राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खाते में भेजी जाती है। यह राशि राज्य सरकार और केंद्र सरकार दोनों मिलकर विभिन्न हिस्सेदारी के आधार पर देती हैं।
नया नियम: Face E-Kyc क्यों अनिवार्य किया गया?
पेंशन योजनाओं में सबसे बड़ी समस्या फर्जी लाभार्थियों और डुप्लीकेट पेंशन लेने वालों की रही है। कई बार पाया गया कि पेंशन लाभार्थी की मृत्यु हो चुकी होती है, लेकिन उसके नाम से अभी भी पेंशन उठाई जा रही होती है।
इन्हीं समस्याओं पर रोक लगाने के लिए सरकार ने Face E-Kyc को अनिवार्य किया है। इसके तहत लाभार्थी का चेहरा आधार डेटाबेस से लाइव ऑथेंटिकेशन के माध्यम से मिलाया जाएगा। इस प्रक्रिया के बाद यह पूरी तरह साफ हो जाएगा कि पेंशन उसी व्यक्ति को मिल रही है, जिसके नाम पर योजना स्वीकृत की गई है।
Face E-Kyc की प्रक्रिया कैसे होगी?
Face E-Kyc प्रक्रिया को बहुत आसान और डिजिटल बनाया गया है ताकि बुजुर्ग या दिव्यांग लोगों को ज्यादा परेशानी न हो। यह प्रक्रिया CSC सेंटर, जन सुविधा केंद्र, बैंक मित्र या मोबाइल ऐप के जरिए पूरी की जा सकती है।
- लाभार्थी को अपना आधार नंबर और पेंशन आईडी देना होगा।
- उसके बाद कैमरे के सामने लाइव फेस स्कैन किया जाएगा।
- सिस्टम स्वतः आधार से मिलान करेगा और ऑथेंटिकेशन सफल होते ही KYC पूरी हो जाएगी।
- जिन लोगों की आँखों या फिंगरप्रिंट से पहले ई-केवाईसी में समस्या आती थी, उनके लिए फेस ऑथेंटिकेशन अधिक उपयोगी साबित होगा।
किन लोगों के लिए यह जरूरी है?
यह नियम सभी वृद्धा, विधवा और विकलांग पेंशन धारकों के लिए अनिवार्य है। यानी जो भी नागरिक पेंशन स्कीम का लाभ ले रहा है, उसे आने वाले समय में अगर फेस ई-केवाईसी पूरी नहीं की जाती, तो उसकी पेंशन रोकी जा सकती है।
सरकार ने इसके लिए एक समयसीमा तय की है। ज्यादातर राज्यों ने अगले कुछ महीनों तक फेस केवाईसी करने का निर्देश दिया है। यदि समय पर सत्यापन नहीं किया गया, तो पेंशन राशि खाते में आना बंद हो सकती है।
सरकार और लाभार्थियों को क्या फायदा होगा?
इस नियम से सरकार को यह लाभ मिलेगा कि गलत तरीके से होने वाली पेंशन निकासी पर रोक लगेगी। साथ ही, सरकारी धन का सही इस्तेमाल होगा और यह सुनिश्चित होगा कि केवल पात्र व्यक्तियों तक ही राशि पहुँचे।
लाभार्थियों के लिए फायदा यह होगा कि पेंशन में किसी भी तरह की धोखाधड़ी या कटौती की संभावना कम होगी। इसके अलावा, फेस ई-केवाईसी की प्रक्रिया सरल और त्वरित है, जिसे घर के पास के केंद्रों पर ही पूरा किया जा सकेगा।
निष्कर्ष
सरकार का नया नियम, फेस ई-केवाईसी, पेंशन योजनाओं को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाएगा। यह कदम ढेरों फर्जी लाभार्थियों को बाहर करेगा और सही पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुँचाने में सहायक बनेगा।
आने वाले समय में सभी पेंशनधारियों के लिए इस प्रक्रिया को अनिवार्य करना उनकी सुविधा और सुरक्षा के लिए एक बड़ा बदलाव साबित होगा।