भारत में जमीन की रजिस्ट्री मतलब जमीन की कानूनी दस्तावेजीकरण, हर व्यक्ति के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। अपने खून-पसीने की कमाई से खरीदी गई जमीन का मालिकाना हक़ सही ढंग से दर्ज होना हर इंसान का सपना होता है। लेकिन अक्सर जमीन से जुड़े मामलों में धोखाधड़ी, फर्जी कागज़ और पुराने विवादों की वजह से लोगों को बहुत परेशानियों का सामना करना पड़ता था।
सरकार ने इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए 1908 के पुराने Registration Act को हटाकर नया Registration Bill 2025 लागू किया है। इस नए कानून का मकसद है जमीन की रजिस्ट्री प्रक्रिया को पूरी तरह से डिजिटल, सुरक्षित, पारदर्शी और आसान बनाना। इसके साथ ही 5 राज्यों में पुराने विवादित या फर्जी रजिस्ट्री के 40% तक को रद्द करने का बड़ा निर्णय लिया गया है, जिससे उन लोगों को राहत मिलेगी जो वर्षों से जमीन विवादों में फंसे हुए थे।
Land Registry Cancellation 2025
सरकार ने उन पांच राज्यों में जहां जमीनों से जुड़े विवाद और धोखाधड़ी के मामले सबसे ज्यादा हैं, वहां करीब 40% पुरानी रजिस्ट्री को कैंसिल करने का निर्णय लिया है। इसका मतलब यह हुआ कि पुराने फर्जी कागज़ या जो विवादित रजिस्ट्री हैं, उन्हें 90 दिनों के अंदर ठीक वैध कारण साबित होने पर रद्द किया जा सकेगा।
यह कदम उन परिवारों और जमीन खरीददारों के लिए एक बड़ी राहत है, जो लंबे समय से जमीन के असली मालिकाना हक के लिए संघर्ष कर रहे थे। इस नए नियम के तहत अगर जमीन की रजिस्ट्री में धोखाधड़ी या झूठे दस्तावेज पाए जाते हैं, तो वे रद्द की जा सकेंगी। इससे जमीन की खरीद-बिक्री में पारदर्शिता बढ़ेगी और फर्जीवाड़ा कम होगा।
नया Registration Bill 2025
1908 का पुराना Registration Act अब बदल चुका है और इसे नया Registration Bill 2025 ने रिप्लेस कर दिया है। यह कानून ऑनलाइन और डिजिटल पंजीकरण की सुविधा देता है। अब जमीन की रजिस्ट्री के लिए आपको बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे। सभी दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड किए जाएंगे और आधार कार्ड से बायोमेट्रिक सत्यापन भी होगा।
नए नियमों के अनुसार, अगर किसी रजिस्ट्री में कोई धोखाधड़ी या विवाद साबित होता है तो उसे 90 दिनों के अंदर रद्द किया जा सकता है। जमीन से जुड़े सारे जरूरी दस्तावेज जैसे बेचने के समझौते, पावर ऑफ अटॉर्नी, खरीद-पत्र और कोर्ट के आदेश भी रजिस्ट्री में शामिल होंगे।
इसकी वजह से जमीन से जुड़े विवाद कम होंगे, कानूनी प्रक्रिया तेज और सरल होगी और सरकार को भी राजस्व में फायदा होगा। साथ ही जमीन के मालिकों को यह भरोसा मिलेगा कि उनकी संपत्ति सुरक्षित है और भ्रष्टाचार या फर्जी कागजों की समस्या से दूर है।
नए नियमों के फायदे आम जनता के लिए
इस नए कानून से न केवल जमीन की खरीद-बिक्री अधिक पारदर्शी होगी, बल्कि आम जनता को भी धोखाधड़ी से बचाव मिलेगा। डिजिटल प्रक्रिया में बायोमेट्रिक जांच होने से नकली दस्तावेज और बेनामी जमीनों की पहचान आसान होगी।
इसके अलावा रजिस्ट्री की पूरी प्रक्रिया का वीडियो रिकॉर्डिंग भी होगा, जिससे धोखाधड़ी या विवाद की स्थिति में प्रमाण मिल सकेंगे। पेमेंट भी अब पूरी तरह डिजिटल होगी जिससे भ्रष्टाचार की आशंका कम होगी।
यह सब बदलाव जमीन संबंधी विवादों के समाधान को आसान बनाते हैं और लोगों का सरकार पर विश्वास बढ़ाते हैं। साथ ही सरकार को भी अपनी ऑनलाइन रिकॉर्डिंग प्रणाली से बेहतर ट्रैकिंग और वित्तीय नियंत्रण का मौका मिलेगा।
कैसे करें जमीन की रजिस्ट्री कैंसिल?
अगर किसी रजिस्ट्री में धोखाधड़ी, परिवारिक विवाद, या कोई वैध कारण होता है तो व्यक्ति 90 दिनों के भीतर रजिस्ट्रार ऑफिस में ऑनलाइन आवेदन कर सकता है। दस्तावेज़ अपलोड करके बायोमेट्रिक सत्यापन करना होगा। उसके बाद अधिकारियों द्वारा जांच-पड़ताल के बाद रजिस्ट्री कैंसिल की प्रक्रिया पूरी होती है।
यह तरीका पैपर वर्क और विवाद को कम करता है और समय भी बचाता है। इस प्रक्रिया को ऑनलाइन और डिजिटल माध्यम से बहुत सरल बनाया गया है ताकि आम लोग भी आसानी से इसका फायदा उठा सकें।
निष्कर्ष
सरकार का यह नया Registration Bill 2025 और पांच राज्यों में 40% जमीन की रजिस्ट्री कैंसिल करने का फैसला जमीन विवादों को कम करने और जमीन की खरीद-बिक्री को सुरक्षित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इससे आम जनता को कानूनी संरक्षण मिलेगा, धोखाधड़ी कम होगी और जमीन की रजिस्ट्री की प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल होकर आसान, पारदर्शी और सुरक्षित बनेगी। यह बदलाव भारत में संपत्ति के स्वामित्व और उसके संरक्षण में विश्वास बढ़ाने वाला साबित होगा।